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ज़िंदगी हमारी दिल से मुस्कुराइ होती ..........

काश हमने हर सुबह भीतर बैठे रावण को मार कर जगाई होती , किसी का दिल दुखाने  से पहले खुद की पलक भर आई होती किसी की इज़्ज़त बेआबरू करने से पहले खुद की बेटी रुलाई होती प्रकृति को नष्ट करने से पहले साँसे मिट्टी में दबाई होती , किसी की हसी उड़ाने से पहले खुद की हसीं उड़वाई होती अन का अनादर करने से पहले उससे की जुदाई होती , मंदिरों में धूध बहाने से पहले किसी पियासे की पियास भुज़ाई होती , तो आज  पल पल ना संस्कारों की जग हॅसायी होती बेटियाँ पराई नही, सिर्फ़ उनकी विदाई होती हृदय में सदभावना , लोगों के समाई होती जग कल्याण में संगत जुटाई होती संतुष्ता से ज़िंदगी बिताई होती ज़िंदगी हमारी दिल से मुस्कुराइ होती ..........

बादशाह कहते थे लोग हमें

बादशाह कहते थे लोग हमें जब तक हम ना समझ थे जब जब सीख कर आगे बढ़े वही लोग नसीहत देने को हर मोड़ पर मिले खड़े ..................

रिश्तों की मिठास हमारी ताक़त होती है

रिश्तों की मिठास  हमारी ताक़त होती है  जिसका हमें एहसास नही होता  पर जब जन्म लेती है ,  उन रिश्तों मे खटास , ताक़त दम तोड़ती है  और हमें एहसास होता है ...............  काश हमें सही वक़्त पर इन बातों  में विश्‍वास हो जाए, और हम कद्र कर सकें उन रिश्तों की  जो हम सोच बैठते हैं की बेवजह थे , पर बाद मे समझ आता है  नसीब वाले थे जो हमने ऐसे रिश्ते थे पाएँ  जो ग़लत फैमियों की बुनियाद पर रख कर हमने गावाएँ .........................

हे प्रभु मैं कहीं भी कैसी भी हूँ, खुश हूँ अगर बिटिया हूँ

हे प्रभु मैं कहीं भी कैसी भी हूँ, खुश हूँ अगर बिटिया हूँ डगर कहीं हो मुश्किलों में मंज़िल हो मगर में खुश हूँ अगर बिटिया हूँ पर्वतों से घबराती नही तूफ़ानो में रुकती नही , क्योंकि में खुश हूँ , अगर बिटिया हूँ बाबा की लड़ली माँ की दुलारी भाई की कलाई की खुसबु हूँ अगर में बिटिया हूँ हर जन्म मुझे बिटिया , का ही देना प्रभु तुझसे मेरी है यही आरज़ू ..............

बादलों की गड़गड़ाहट कह रही है अब वो सुकून नही

बादलों की गड़गड़ाहट कह रही है अब वो सुकून नही बरसा करते थे हम अपनी धुन में अब वो जुनून नही , क्योंकि हमारी बूँदों की टिप टिप अब धरती वासियों जागती नही पुकारा करती थी हमें जो आवाज़ वो अब हम तक आती नही , संसारिक सुख की चाह में मनुष्य हुमको भूल गया इसलिए सावन का झूला सूखा ही झूल गया

ज़िंदगी से शिकायते नही रखी हमने सोचा जो मिला वो भला ,

ज़िंदगी से शिकायते नही रखी हमने सोचा जो मिला वो भला   , पर इसका मतलब ये नही कि हमें गम ही ना मिला , हमें एहसास देर से हुआ की ज़माना हमसे जलता रहा ये सोच कर की ये क्या किस्मत लेकर पला, आज मन कहता है............... गम मे मुस्कुराना हमारे लिए मुश्किल था, गम दिखना आसान दुनिया कैसी है मैं समझ ना पाया नादान

सपने

सपने खुवाबों में तुम रखते हो हमसे वास्ता हर उम्मीद का गुज़रता है तुमसे रास्ता , खो जाते हो तुम , भोर होने पर ढूंढता रहता हूँ तुम्हे हर डगर , क्या वास्तविकता से तुम्हारा नाता नही या होश में बैठा मानव तुमको भाता नही .............