अब समझ में आने लगा है कि हम जो चाहे करले.. जो चाहें सोच ले.. होगा वही जिसमे उसकी मर्जी है.. पर एक बात पक्की है जो मंजिल की चाहत में ज़मी आसमां एक कर दे.. वो उसकी अवश्य सुनता अर्जी है...
जब आसूंओं से बात ना हो सके तो बहा देना बेहतर है.. जब कोई अपना आवाज़ ना सुन सके तो खुद को खामोशी की चादर उड़ा लेना बेहतर है जब अपना कोई विश्वास ना कर सके तो सफाई ना देना बेहतर है जब कोई बेवजह अपना बनाने कि कोशिश करे तो उसका बन जाना बेहतर है.. और जब सारे रास्ते ही बंद नज़र आने लगे तो ये समझ लेना ईश्वर का रास्ता खुलने वाला है ज़िन्दगी का असली सुकून मिलने वाला है...
चांद सितारों में नहीं मैं तेरे चरणों में स्थान चाहता हूं हे जग के स्वामी तू मेरे साथ रहे सदा मैं यही वरदान चाहता हूं हर हर महादेव Har Har Mahadev तेरा दर्द भी मेरा है यदि तुमने त्यागा तेरा मेरा है....