आंसू ना दिखा एक भी जिसकी आंख में छिपाए बैठी वो समुंदर थी.. जितनी सादी वो बाहर से थी उतनी गहरी अंदर थी.. मन की पीड़ा कह नही पाई ज़माने को हसाती थी.. जाने कौनसा हौसला था भीतर उसके जिससे वो हर हाल में आगे बढ़ जाती थी..
हम आज भी उन्हीं पलों में जीते हैं जिनमें हम सिर्फ तुम्हारी बातों को सीतें हैं मेरे सनम तुम हमारे हर लम्हें में हो.. हम कैसे यकीं दिलाएं बिन तुम्हारे अब तक जिंदगी के पल कैसे बीते हैं..