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कुछ तुम कह दो कुछ मैं कह दूंगी बस सच ये है कि तुम जहां ले जाओगे वहां रह लूंगी

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कुछ तुम कह दो कुछ मैं कह दूंगी बस सच ये है कि तुम जहां ले जाओगे वहां रह लूंगी  

आंसू ना दिखा एक भी जिसकी आंख में

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आंसू ना दिखा  एक भी जिसकी आंख में  छिपाए बैठी वो समुंदर थी..  जितनी सादी वो बाहर से थी  उतनी गहरी अंदर थी..  मन की पीड़ा कह नही पाई  ज़माने को हसाती थी..  जाने कौनसा हौसला था भीतर उसके  जिससे वो हर हाल में आगे बढ़ जाती थी..  

हमारी तरकीब काम कर गई...

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वो आए थे शिकायतों का पिटारा लेकर और हम खुश हुए.. कि हमारी तरकीब काम कर गई...  

बिन तुम्हारे

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हम आज भी उन्हीं पलों में जीते हैं जिनमें हम सिर्फ तुम्हारी बातों को सीतें हैं मेरे सनम तुम हमारे हर लम्हें में हो.. हम कैसे यकीं दिलाएं बिन तुम्हारे अब तक जिंदगी के पल कैसे बीते हैं..  
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निकल पड़ी है अब अंधेरे से अंधेरे में उजाला बन कर... वे दया के योग्य भी नहीं जो नारी को कमज़ोर समझते हैं नारी की कोक से ही जन कर...  

तू लिख दे आज या केह दे...

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तू लिख दे आज या केह दे.. जो मिला है और जिसकी चाहत थी?? हुआ हो.. चाहे जो भी... पर कहने की आज तुझे भी इजाज़त थी....