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तुझे इस तस्वीर में जो सुकू नज़र आता है मुझे वो तेरे बात करने से मिल जाता है...

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तुझे इस तस्वीर में जो सुकू नज़र आता है मुझे वो तेरे बात करने से मिल जाता है...  

कुछ लब्ज़ उतार दिए

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खामोश हूं बेजुबां नहीं ... बस बेवजह में बोलता नहीं क्या सोचा तुमने कि मैं समझता नहीं? मैं सब समझता हूं बस तुम्हें अपना इस कदर समझ बैठा हूं .. कि उसके आगे अब ना ही मुझे कुछ और ... और ना ही मैं किसी को जचता हूं... कुछ लब्ज़ उतार दिए कुछ पुचकार दिए कुछ जज्बातों के चलते ...सवार दिए कुछ वक्त के आगे वार दिए... सच.. ज़िन्दगी...खिल जाती है यदि परिस्थितियों में मिल जाती है..  

दोस्तों ने यूँ रखा है मुझे संभाल कर

कुछ दोस्तों ने यूँ रखा है मुझे संभाल कर कि क्या बताउँ खरा उतर जाता हूँ....ज़िंदगी की हर चाल पर