शायद तुम्हें एहसास नहीं मेरी इस बात पर तुम्हें विश्वास नहीं कि मेरी हर सांस में तुम्हारा ज़िक्र है मेरा जीवन तुम्हारे सुख दुख का मित्र है मैं तन मन से तुम्हारा हो चुका हूं जबसे लिपटा मेरी रूह से तुम्हारी मोहब्बत का इत्र है वो एक सच्चे आशिक का आशियाना था जिसे तुमने आम जाना था वो तुम्हारी मोहब्बत में दीवाना था जिसे तुमने पगला जाना था उसका तुम्हारी गलियों में सिर्फ तुम्हारे लिए ही अनजाना था वो सरफिरा खुद को खो कर ही माना था एक बार तो झांक लेते उसके दिल में तुम्हारे लिए छोड़ कर आया था वो ज़माना ...