खुद से खुद को क्यों छुपाना


ज़िन्दगी कभी खामोशी है..
कभी शोर है..
कभी दुअंध है..
तो कभी एक छोर है..
पर ये भी सत्य है
जब जागो जब से ही भोर है..
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