love
शायद तुम्हें एहसास नहीं
मेरी इस बात पर तुम्हें विश्वास नहीं
कि मेरी हर सांस में तुम्हारा ज़िक्र है
मेरा जीवन तुम्हारे सुख दुख का मित्र है
मैं तन मन से तुम्हारा हो चुका हूं
जबसे लिपटा मेरी रूह से
तुम्हारी मोहब्बत का इत्र है
वो एक सच्चे आशिक का आशियाना था
जिसे तुमने आम जाना था
वो तुम्हारी मोहब्बत में दीवाना था
जिसे तुमने पगला जाना था
उसका तुम्हारी गलियों में सिर्फ
तुम्हारे लिए ही अनजाना था
वो सरफिरा खुद को खो कर ही माना था
एक बार तो झांक लेते उसके दिल में
तुम्हारे लिए छोड़ कर आया
था वो ज़माना
आओ एक बार फिर
कुछ सपने साथ देखें
जो बिखर गए लम्हें
उन्हें छोड़ मोहब्बत से भरे
हसीन पल फिर समेट लें
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