हस्ते चेहरों को खामोश कर देना दुनिया का दस्तूर है क्योंकि दुनिया आदत्त से मजबूर है पर उसी दुनिया को नज़र अंदाज़ कर मुस्कुराकर निकाल जाना काश बन जाए एक फितूर कमाल होगा ज़रूर
समझ नहीं आता कि हम ज़िन्दगी से खफा है या खुद से जुदा है और यदि वो दे रही सब तो फिर ये कैसी वफ़ा है.. हम चाहे या ना चाहें कभी कभी परिस्थिति हमें उस ही मोड़ पर ला कर खड़ा कर देती है जिसे हम बहुत पीछे छोड़ आते है.....
जो गुज़र गया वो लौट कर नहीं आता जो लौट कर आजाए वो गुज़रा हुआ नहीं कहलाता अपने वजूद को खो कर तू किसका है, अपने अतीत संग रो कर तू किसका है अपने भविष्य की चाह में तू क्यों रिस्ता है वर्तमान में रेह कर देख तुझे कितना कुछ उस पल में मिलता - दिखता है...
कोरोना ने ज़िन्दगी की कैसी काया पलट कर रख दी है अपनों के होते हुए अपनों से दूर कर दिया अपनों के बिना जीने पर दुख- सुख दोनों परिस्थिति में मजबूर कर दिया... कहते हैं हर चीज की एक उम्र होती है वैसे ही ये भी कहते हैं शौक पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती कहते है... बरदाश करने की एक सीमा होती है साथ ही ये भी कहते हैं दुनिया में किसी चीज की कोई सीमा नहीं होती.. समझाना जरा मुश्किल हो जाता है. अक्सर इंसा जब मझधार में फंस जाता है....
लिख देते है हम जो भी मन की बात तुम ये मत समझना कि लिखते हैं। तुमको करवाने के लिए एहसास .... बल्कि लिखते हैं इस कारण जो तुम कुछ भी कह कर निकल जाते हो और हम कह नहीं पाते इस तरह हम दबा पातें हैं वो एहसास...... हम समझ गए कि वो हमे समझ नहीं पा रहे हमने भी खामोशी ओड ली ये सोच कर कि कमसेकम इस बहाने ही सही वो हमे समझने की कोशिश तो करते जा रहे... .