Anubhav
जो गुज़र गया वो लौट कर नहीं आता
जो लौट कर आजाए
वो गुज़रा हुआ नहीं कहलाता
अपने वजूद को खो कर तू किसका है,
अपने अतीत संग रो कर तू किसका है
अपने भविष्य की चाह में तू क्यों रिस्ता है
वर्तमान में रेह कर देख
तुझे कितना कुछ
उस पल में मिलता - दिखता है...
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