मैं फिर भी ज़िंदा हूँ मौत से मिलकर किसी को मार देना , फिर भी आसान है जीते जी किसी के ज़मीर को मार कर , उसे ज़िंदा रहने पर मजबूर कर देना क्या कहूँ ....... मैं......क्या कहूँ वो एक लाश है हर जगह है शमशान जिस्म तो ज़िंदा है पर मर गया भीतर बैठा इंसान , देखती है वो हर ओर नज़र आता है अंधेरा उसके जीवन में वो रात रह जाती है जिसका नही हो पाता कोई सवेरा , जीती है फिर भी वो क्योंकि साँसों का हिसाब पूरा हुआ नही मर कर उसने इंसाफ़ पाया तो क्या जो ज़िंदा रह कर , जीया ही नही................ मैं फिर भी ज़िंदा हूँ धन्यवाद