Be Positive

अब समझ में आने लगा है
कि हम जो चाहे करले..
जो चाहें सोच ले..
होगा वही जिसमे उसकी मर्जी है..
पर एक बात पक्की है
जो मंजिल की चाहत में ज़मी आसमां एक कर दे..
वो उसकी अवश्य सुनता अर्जी है...






 

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