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कहीं दूर एकेले सुनसान सड़क पर हम

 कहीं दूर एकेले सुनसान सड़क पर हम तन्हाईओं ने हमे जकड़ा या बेबसी को कमज़ोर बना हमने पकड़ा खुद को भिगो रहे थे या बारिश की बूँदो से मैल को धो रहे थे, मायूसी का नज़ारा था क्या वक़्त का इशारा था खामोशियाँ बहुत कुछ बयान कर रही थी, लिफाफो में बंद पन्नो को खोल थम रही थी, चंद हसीन लम्हों की झलक दिखा जिनको देख मन में उत्साह फिर जगा, तुरंत वक़्त को सलामी दे तोड़े बंधन गुलामी के, छोड़े वो बेबसी के पल उसी वक़्त के हाथ में निकल पड़ा लेकर वही लकीरे जिन पर मिट्टी जम गई थी जिनके कारण कुछ पल ज़िंदगी थम गई थी....

रंगों ने मेरी ज़िंदगी

रंगों ने मेरी ज़िंदगी  कुछ इस तरह खिलाई जिस  रंग को मैने अपनाया उस रंग ने मेरी एक नई पहचान बनाई........

आशिक हैं तेरे

आशिक हैं तेरे तेरी हर अदा पर मरते हैं, जब तक तुझे ना देखें साँस नही भरते हैं, कब तक तड़पाएगी बाहों में कब समाएगी, आजा बन कर पानी मैं पियासा तेरा, क्या कहूँ बहुत कोशिश की पर बिन तेरे मैं जी नही सका..............

कदम ज़िंदगी में कभी रुकने नही चाहिए

कदम ज़िंदगी में कभी रुकने नही चाहिए रुकना चाहिए गर ......... तो वो है ना उम्मीदि का ख़याल..................

कैसे कहूँ मन की बात

कैसे कहूँ मन की बात हालत रोक रहें है, आज आँखें ही पढ़ लेना दोस्तों, जज़्बातों से गुफ्तगू कभी और कर लेंगे, आज इन आँखों के सैलाब की बारी है जिनकी तुम्हारे कंधों से यारी है.............

रूठ गई अगर ज़िंदगी

रूठ गई अगर ज़िंदगी उसे मनालो जो अब तक सो रहा है जतन कर उसे जगालो, जो रिश्ते पियार की डोर से बँधे हैं उन्हें निभलो यदि समय की कमी है तो कुछ भी करो ..... उसे निकालो फलसफा ज़िंदगी का बहुत आसान है उसे सुलझालो, जो आज तुम्हारे लिए खड़ा है उसके संग तुम भी कदम बढ़ालो, मत भुनो खुद को इस भागती हुई ज़िंदगी की लड़ाई में......... जो तुम्हारे संग मन लगाए बैठा है तुम उसके संग मन लगालो, हफ्ते में एक शाम दोस्तो के संग बितालो, जो जिस पल मिल जाए उस पल उसके मज़े उतालो...............

छू लेता है , तेरा दर्द मुझे

छू लेता है , तेरा दर्द मुझे बिन कहे तेरे ये मेरी चाहत है या दीवानगी मैं नहीं जानता , मुझे तुझमें .... मेरा रब दिखता है बस मैं ये हूँ मानता............