कैसा अजीब सा दौर है ये रिश्तों में वो नीव ही नही है इंसान है... पर उसमें वो जीव ही नही है सब हो रहा है .. पर इंसा सो रहा है..
कैसा अजीब सा दौर है ये
रिश्तों में वो नीव ही नही है
इंसान है...
पर उसमें वो जीव ही नही है
सब हो रहा है ..
पर इंसा सो रहा है..

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