ध्वंध है स्वॅम से स्वॅम से ध्वंध है

 ध्वंध है स्वॅम से

स्वॅम से ध्वंध है
आंखों में रोशनी है
तो दृष्टि क्यों मंध है
ये पहली है तो कैसी है
जहां रचने वाला वो स्वॅम है
किरदार भी उसके हैं
और चाल भी उसकी है
तो कर्म क्यों नहीं सम हैं...


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