बस इतना रिश्ता निभा जाना जब बुलाऊंगी हो सके तो तब तुम आजाना

 बस इतना रिश्ता निभा जाना

जब बुलाऊंगी
हो सके तो
तब तुम आजाना
मैने दिल से चाहा है तुम्हें
एक बार फिर सुन जाना
मेरे मन की बात
किसी और से बांट नही पाऊंगी
बस तुम इतना वक्त
और दे जाना
हक है इसलिए कह रही हूं
ये भी चाहत का एक रूप है
मीरा की तरह इसे
समझ जाना
मैं ढूंढूंगी तुम्हें... तुम आओगे स्वॅम
इस ताकत को
आज़मा जाना.....
आसां हो कर भी
ये एक तरफा इश्क
आसां नहीं
स्वॅम उलझ कर सुलझा जाना.....
बस इतना रिश्ता निभा जाना

Comments

Popular posts from this blog