कभी कुछ समेटा नहीं इसलिए ही बिखरा नहीं अनुभव था किसी का समय पर उतार लिया खुद को सवार लिया जिसको जैसे देखनी है देख लो भाई सृष्टि सबकी लिए एक जैसी बनी है चाहे तो सवार लो या बिगाड़ लो भाई
ये फिर केसा सा वक्त है क्यों इतना ज़्यादा सख्त है फिर से पृथ्वी तिलमिला उठी है कोरोना के कहर से कांप उठी है हे प्रभु उपचार करो हमसे हुई भूल को माफ़ कर उपकार करो
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