कौन कहता है कि आस्मा की कोई जुबां नहीं कभी बारिश की टिप- टिप के साथ वक्त बिताओ पता चला जाएगा क्या कहना चाहता है आसमान और किस किस तरह वो भी अपना दर्द करता है बयां अक्सर ऐसे हालात हैं चांद हमारे साथ है और हमें अमावस्या की तलाश है ...
अब समझ में आने लगा है कि हम जो चाहे करले.. जो चाहें सोच ले.. होगा वही जिसमे उसकी मर्जी है.. पर एक बात पक्की है जो मंजिल की चाहत में ज़मी आसमां एक कर दे.. वो उसकी अवश्य सुनता अर्जी है...
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