आखिरी मुलाकात

 ज़रा सा और ठहर जाते

आखिरी मुलाकात थी
तो कमसेकम दो गढ़ी जी भर कर देख तो जाते..
मुझे रोकने का हक़ तो था ही नहीं
तो इतनी सी खता और कर जाते..
हमें मौवजे के बतौर बस ज़रा सा हां हां....
ज़रा सा और
वक्त ही दे जाते...

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