एक ज़माना था...
जब कहा जाता था ...
सुख जितना बाटों बढ़ता है।
दुख जितना बटों उतना कम होता है..
और एक ज़माना आज है
सुख मत बाटों नज़र लग जाएगी..
और दुख मत बताओ लोग क्या सोचेंगे....
खुद पर ना कर इतना गुमान कि खुदा की रहमतो को भाँप ना सके, मौत सबको मिटी मे हे मिलती है क्या सोचता है तू खुले आकाश के तले, यदि फर्क सिर्फ़ अमीरी ग़रीबी का है तो ये बस पैसे का कमाल है, खुदा ने तो हम सबको एक जैसा हे बनाया है उपर मिलकर पूछूँगा तुझसे बोल……. अब तेरा क्या ख़याल है………. धन्यवाद सोनाली सिंघल
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