आज़माना चाहता हूँ मैं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 26, 2021 अब तूफानों से टकरा कर देखना चाहता हूं मैं कि अपनों की अपनों के बीच खड़ी की गईं दीवारें ज़्यादा कठोर हैंया तूफानों की बेरहम ईंट...इनका रुख मोड़ना आसां हैया अपनों का?आज़माना चाहता हूँ मैंकि आखिर कौन है ढींट.... Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
खाली हो गई May 12, 2021 शहर सूने हो गए दोपहर काली हो गई.. ये तेरे मेरे बच्चन की किताब जाने कैसे खाली हो गई। Read more
कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... May 26, 2021 कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... Read more
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