anubhav



उलझ गए वो
उस ही तरह आज..
जिस तरह कभी हमें उलझाया करते थे..
हमने तो ठोकर खा कर
चुप्पी ओड ली
बात सवारना सीख लिया था..
देखना ये है कि अब उन्हों ने
इससे क्या सीख लिया है..


 

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