इबादत


चांद की चाहत नहीं. ..
जहां तुम हो हर इबादत है वहीं..



ये नज़ारा नहीं...
खूबसरत तुम्हारा साथ है...
मैं इक खूसूरत परिंदा हूं...
जब तक तुम्हारे हाथों में मेरा हाथ है...


 

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