love
हमारी आंखों में मोहब्बत देख
वो हमसे मोहब्बत कर बैठे
जुबां से मन की बात जब ज़ाहिर की
वो समझ नहीं पाए
इसे मैं वक़्त का समझू बदलाव
या मोहब्बत में ठहराव
बतला देना
इससे पहले ज़खम बन जाए घाव
भीगी भीगी तेरी पलके
जब मेरे आँचल में छलके
मुझे डुबो देती है..
आखिर तू कह क्यू नही देती है
इस तरह कब तक तड़पाएगी
अपने मन की पीड़ा कब बताएगी,
वेसे मे जनता हूँ सब
पर तेरे होठों से सुनना चाहता हूँ,
तुझे खाली कर देना चाहता हूँ
तेरी पलके फिर कभी ना भीगे
तेरी रूह को फिर जिंदा कर देना चाहता हूँ...
Comments
Post a Comment