सब हैं आस पास

बहुत कुछ कह गई थी आज
ये सोच कर कि
खाली कर लूंगी खुद को
क्या पता था जिसके आगे मन रख दूंगी
वो स्वम भरा मिलेगा
उसका वक़्त मेरे वक़्त से ज़्यादा कड़ा मिलेगा


सब हैं आस पास
फिर भी नज़रे
किसी को ढूंढ़ती हैं
जब जब " तुम्हें कुछ नहीं आता "
कानों में ये आवाज़ गूंजती है
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