माँ Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 10, 2020 मैंने तुम्हारी आवाज़ में वो दर्द सुना है मां जिसे पूछने पर कुछ है ही नहीं कह तुमने बुना है मां अपने ही अनुभव से मैं आज भी उभरता हूँ मैं असूलो का पक्का शायद इसलिए आज भी एकेले रास्तों से गुजरता हूं ज़िन्दगी की खूबसूरती मेंहर पलये इशारा है।जो तुम्हारे लिए तय है हर ओर उसी का नज़ारा है Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
खाली हो गई May 12, 2021 शहर सूने हो गए दोपहर काली हो गई.. ये तेरे मेरे बच्चन की किताब जाने कैसे खाली हो गई। Read more
कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... May 26, 2021 कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... Read more
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