anubhav
एक वक़्त था
जब रिश्तों में ज़िम्मेदारियां
प्यार से लिपटी थी
एक आज का वक़्त है
इंसान खुद से भी प्यार नहीं कर पा रहा
उदास हो जाती है
बिन बात नाराज हो जाती है
समझ पाएं इससे पहले कुछ
वो रास्ते भी मोड जाती है
आखिर ये ज़िन्दगी क्या चाहती है
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