anubhav
तुम आए तुम्हारी अपनी मर्जी
तुम गए तुम्हारी अपनी मर्जी
हम ने स्वीकारा सोच कर खुदा की है मर्जी
तो अब और कैसे तड़पाना चाहते हो
बता दो
क्या अब भी इम्तेहान लेना चाहते हो
ज़िन्दगी एक मजाक है।
यदि आप उसके संग जीना नहीं जानते
जो आपके पास है
हां तुम्हारी चाहतें हैं..
कोई बात नहीं
पर याद रखना
अनमोल सदा वो है
जिसके लिए हम खास हैं
ढूंढता हूं उसे जिसमें कोई एहसास हो
दिल से मुलाकात हो
टकराते जज्बात हो
बिन कहे बातें खास हो
भले ना हो पाए दीदार
पर भरा हर एहसास में प्यार हो
छोड़ कर जाऊँ जब ये हसीन दुनिया
वो मौजूद हो या ना हो
जब खुदा से मिलूं
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