anubhav Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 20, 2020 अब और इससे ज़्यादा तन्हा मत छोड़ो कि मैं बिखर जाऊं शायद ये भी मुमकिन हो मैं तुम बिन और भी निखार जाऊं वो स्वयं से गुमराह है जो सत्य से अनजान है वो स्वयं सत्य है जिसका कर्म प्रधान है Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
खाली हो गई May 12, 2021 शहर सूने हो गए दोपहर काली हो गई.. ये तेरे मेरे बच्चन की किताब जाने कैसे खाली हो गई। Read more
कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... May 26, 2021 कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... Read more
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