Sirf Anubhav
तुम जब भी हमें नीचा दिखाने की
कोशिश करते हो ना
सच कहें हमे बुरा नहीं लगता
क्योंकि हम तो अब खुद को दफना कर तुम्हारे साथ रहते है
बल्कि विचार करने की बात ये है कि
तुम्हें कभी ताजुब नहीं हुआ
हम ये सब कैसे सहते हैं
बिन सोचे ज़िन्दगी कई बार
कुछ यूँ उलझ जाती है
कि ठीक ठाक दिखने वाले रास्ते पे चलने पर भी
हवाएं हमें कंकर पत्थर वाले रास्तों पर मोड ले जाती है
आंखों देखी नजर अंदाज़ करना पड़ता है
और जिस पर मन नहीं ठुक ता
उस पर भी विश्वास करना पड़ता है
बेशुमार थी मोहब्बत उसके पास भी मेरे पास भी
बस फर्क इतना रहा उसने सिर्फ दिखाना सीखा देना नहीं
मैंने सिर्फ देना सीखा दिखाना नहीं
वो आंखों से लुटी
मैं दिल से लुटा
कोई नहीं था किसी से खफा
ताजुब की बात ये कि
दम मोहब्बत में दोनों का ही घुटा
आंसू आंख में हैं
उसके ये कैसे
दर्द का एहसास हो रहा हो जैसे
कोई आवाज़ नहीं कोई बारिश नहीं
इक चिंगारी छलक रही है ये कैसे
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