khoobsurat ehsaas Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 26, 2020 झुकने का मन नहीं था पर झुक जाने में ही समझदारी थी एक बार फिर ज़िन्दगी को हार कर जीतने की बारी थी ढल रहे थे हम भी सूरज की ही तरह चांद के लिए और वो हैं कि एक पल के लिए भी इस बात को मानने को तैयार नही कुछ इस तरह घुल जाती हूं जब मैं खुद से मिल जाती हूं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
हमारे जवाब में बस मुस्कुरा दिया करो वही काफ़ी है. May 15, 2018 तुम्हारी खामोशी भारी मुस्कुराहट बहुत कुछ कह जाती है..... लफ़्ज़ों का क्यों बेवजह इस्तेमाल करती हो हमारे जवाब में बस मुस्कुरा दिया करो वही काफ़ी है............ Read more
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