khoobsurat ehsaas Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 26, 2020 झुकने का मन नहीं था पर झुक जाने में ही समझदारी थी एक बार फिर ज़िन्दगी को हार कर जीतने की बारी थी ढल रहे थे हम भी सूरज की ही तरह चांद के लिए और वो हैं कि एक पल के लिए भी इस बात को मानने को तैयार नही कुछ इस तरह घुल जाती हूं जब मैं खुद से मिल जाती हूं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
खाली हो गई May 12, 2021 शहर सूने हो गए दोपहर काली हो गई.. ये तेरे मेरे बच्चन की किताब जाने कैसे खाली हो गई। Read more
कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... May 26, 2021 कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... Read more
Comments
Post a Comment