anubhav Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 30, 2020 अब तो हवाएं भी कराहने लगी हैं समा भी खोमिशी की चादर ओढ़ बैठा है दिलों में तूफान है मानो हर सांस में एक शैतान है बस क्या कहूं विनती है तुझसे चल पड़ ओ थमे हुए वक़्त इतना ना भी ले इम्तेहान तू तो ऐसा नहीं था तू क्यों बनता जा रहा है इंसानपहले वक्त तुम्हारे हाथ में था पर तुम्हारे पास नहीं अब वक्त तुम्हारे पास है। पर तुम्हारे हाथ में नहीं कमाल देखो तब तुम भाग रहे थे वक्त नहीं अब वक्त भी बैठा और तुम भी पर कुछ कर सकते नहीं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
हमारे जवाब में बस मुस्कुरा दिया करो वही काफ़ी है. May 15, 2018 तुम्हारी खामोशी भारी मुस्कुराहट बहुत कुछ कह जाती है..... लफ़्ज़ों का क्यों बेवजह इस्तेमाल करती हो हमारे जवाब में बस मुस्कुरा दिया करो वही काफ़ी है............ Read more
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