anubhav Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 30, 2020 अब तो हवाएं भी कराहने लगी हैं समा भी खोमिशी की चादर ओढ़ बैठा है दिलों में तूफान है मानो हर सांस में एक शैतान है बस क्या कहूं विनती है तुझसे चल पड़ ओ थमे हुए वक़्त इतना ना भी ले इम्तेहान तू तो ऐसा नहीं था तू क्यों बनता जा रहा है इंसानपहले वक्त तुम्हारे हाथ में था पर तुम्हारे पास नहीं अब वक्त तुम्हारे पास है। पर तुम्हारे हाथ में नहीं कमाल देखो तब तुम भाग रहे थे वक्त नहीं अब वक्त भी बैठा और तुम भी पर कुछ कर सकते नहीं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
खाली हो गई May 12, 2021 शहर सूने हो गए दोपहर काली हो गई.. ये तेरे मेरे बच्चन की किताब जाने कैसे खाली हो गई। Read more
कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... May 26, 2021 कोई बात नही एकसर ऐसा होता है - ये जिंदगी है साहब... ख्वाब हर कोई बोता है... Read more
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