नज़ाने ये बेटियाँ कब तक लड़ेंगी नज़ाने ये बेटियाँ कब आज़ाद फिरेंगी

कमाल है ना
चलन बेटियों को मारने काबराबर चल ही रहा है
पहले कोक में था
फिर पैदा होते ही
फिर ग़लती से पालली तो अरमानो का गला घोंट कर
फिर बाल विवाह करवा कर
कभी सती बना कर
ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल करकर
उस पर अतयाचार करकर
. का हर रूप से बलात्कार कर कर 
इन सब में बदलाव लाने में नज़ाने कितनी पीढ़ियाँ खून के आँसू रो रो मर चुकीं होंगी
ये सब कुछ ही बदला 
जो बरदाश ना हुआ
तो अब औरत के जिस्म को नोच नोच कर ज़िंदा जलाने का . चलन पैदा हुआ

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