हर कदम पर साथ चलना बात नही हाथो मे हाथ रखना, लवज़ो से कह ही नही पाऊँगा मेरी आवाज़ नही .....खामोशी को पढ़ना, ये कला मैने तुमसे ही सीखी है आँखों के रास्ते ही तो महोबत जीती है, तभ मैं नही समझ पाता था अब समझा हूँ जब भी कुछ कहता था तुम खामोशी से क्यूँ एक्रार करती थी, अब ज़माने की नज़र से मैं डरता हूँ पहले तुम डरती थी.....

हर कदम पर साथ चलना
बात नही हाथो मे हाथ रखना,लवज़ो से कह ही नही पाऊँगा
मेरी आवाज़ नही .....खामोशी को पढ़ना,ये कला मैने तुमसे ही सीखी है
आँखों के रास्ते ही तो महोबत जीती है,
तभ मैं नही समझ पाता था अब समझा हूँ
जब भी कुछ कहता था
तुम खामोशी से क्यूँ एक्रार करती थी,
अब ज़माने की नज़र से मैं डरता हूँ
पहले तुम डरती थी.....

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