ज़िंदगी की गाड़ी कहीं रुक गई थी शायद मैं अबकी बार परिस्थितियों के आगे झुक गई थी............ वही नीला आकाश आज फीका सा नज़र आ रहा था क्योकि देखना जिसे चाह रही थी वो दिख नही पा रहा था....
ज़िंदगी की गाड़ी
कहीं रुक गई थी
शायद मैं अबकी बार
परिस्थितियों के आगे झुक गई थी............
वही नीला आकाश
आज फीका सा नज़र आ रहा था
क्योकि देखना जिसे चाह रही थी
वो दिख नही पा रहा था....
कहीं रुक गई थी
शायद मैं अबकी बार
परिस्थितियों के आगे झुक गई थी............
वही नीला आकाश
आज फीका सा नज़र आ रहा था
क्योकि देखना जिसे चाह रही थी
वो दिख नही पा रहा था....
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