ज़िंदगी में सब कुछ ख़ास था जब तू पास था, मुमकिन था सब मैं क्या कहूँ अब, तू एक ऐसा आसमाँ था जो मेरे पल- पल से जुड़ा था, तू मेरे मन की सुन लेता था मैं जब जब गुनगुनाती थी, कैसे बताओं तेरे साथ पर मैं कितना इतराती थी........
ज़िंदगी में सब कुछ ख़ास था
जब तू पास था,
मुमकिन था सब
मैं क्या कहूँ अब,
तू एक ऐसा आसमाँ था
जो मेरे पल- पल
से जुड़ा था,
तू मेरे मन की सुन लेता था
मैं जब जब गुनगुनाती थी,
कैसे बताओं
तेरे साथ पर
मैं कितना इतराती थी........
जब तू पास था,
मुमकिन था सब
मैं क्या कहूँ अब,
तू एक ऐसा आसमाँ था
जो मेरे पल- पल
से जुड़ा था,
तू मेरे मन की सुन लेता था
मैं जब जब गुनगुनाती थी,
कैसे बताओं
तेरे साथ पर
मैं कितना इतराती थी........
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