गुज़रता हूँ अक्सर शमशान से हो कर उछलते ख्यलातो के पैर थम जाते हैं डगमगाते कदम धरती पर टिक जाते हैं....

गुज़रता हूँ अक्सर शमशान से हो कर
उछलते ख्यलातो के पैर थम जाते हैं
डगमगाते कदम धरती पर टिक जाते हैं.... 

Comments