नही मिलता मैं उस हकीम से

ज़िंदगी से हार कर भी
मैं लड़ता हूँ
है साँस जब तक
मैं आस करता हूँ

काँटे हैं हर कदम
मैं अपने विश्वास संग पाँव रखता हूँ
जिस नाव में छेक है
मैं उस नाव को भी साथ रखता हूँ............

महोब्बत है मुझे
अपने यकीन से
इसलिए नही मिलता मैं उस हकीम से
जो मेरे ज़ख़्मों पर मल्हम लगता है........
आज का सफ़र कल पार करना
मुझे सिखाता है..........

शायद इसलिए ही मैं हर मुश्किल से लड़ पता हूँ
दिल और दिमाग़ दोनो संग बराबर रिश्ता निभाता हूँ...............

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