हम मुक़द्दर से नही माँ के घर निकलते हैं शायद यही वजह हो हमारे रास्तों पर कितने भी काँटे हो मंज़िल पर फूल ही मिलते हैं......

हम मुक़द्दर से नही
माँ के घर निकलते हैं
शायद यही वजह हो
हमारे रास्तों पर कितने भी काँटे हो
मंज़िल पर फूल ही मिलते हैं......

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