ये वो दर्द है जिसकी कोई दवा नही............. ये वो क़र्ज़ है जिसकी हमें हवा नही.................. ये वो आवाज़ है जो उठी पर कोई सुनता नही ये वो दुनिया है जिसकी कुद्रट भी अब गवाह नही............ sonalinirmit
तुम्हारी खामोशी भारी मुस्कुराहट बहुत कुछ कह जाती है..... लफ़्ज़ों का क्यों बेवजह इस्तेमाल करती हो हमारे जवाब में बस मुस्कुरा दिया करो वही काफ़ी है............
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