गुज़र रहे थे जब हम अंजान गलियों से हर जगह मेहकमा अपना ही नज़र आया ...... समझ ना पाए हम इस रहस्य को दो पल फिर गौर फरमाया तो जाना सबका दिल किसी अपने ने था ठुकराया

गुज़र रहे थे
जब हम अंजान गलियों से
हर जगह मेहकमा अपना ही नज़र आया ......
समझ ना पाए हम इस रहस्य को दो पल
फिर गौर फरमाया तो जाना
सबका दिल किसी अपने ने था ठुकराया

Comments

Popular posts from this blog