सुख की कामना सब करे तपस्या ना करे कोई, दान भी करें दिखावे को तो सुख का बीज कहाँ बॉई , सूर्य निकले हर सुबह हम पूजे पत्थर सुबह होई चंद्रमा दे जब शीतलता तब जग सारा सोई....... हे मनुष्य फिर तू क्यों रोई
सुख की कामना सब करे
तपस्या ना करे कोई,
दान भी करें दिखावे को
तो सुख का बीज कहाँ बॉई ,
सूर्य निकले हर सुबह
हम पूजे पत्थर सुबह होई
चंद्रमा दे जब शीतलता
तब जग सारा सोई.......
हे मनुष्य
फिर तू क्यों रोई
तपस्या ना करे कोई,
दान भी करें दिखावे को
तो सुख का बीज कहाँ बॉई ,
सूर्य निकले हर सुबह
हम पूजे पत्थर सुबह होई
चंद्रमा दे जब शीतलता
तब जग सारा सोई.......
हे मनुष्य
फिर तू क्यों रोई
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