नसीब से मिले महोब्बत से भरे वो हमे अपने दिल में बसा कर बैठे हैं अब समझे हम इतने खुश कैसे रहते हैं एक खुदा दुआ करता तुझसे ये दोस्तों का दीवाना कि मकबरा हो या आशियाना मैं रहूं वहीं जहाँ मेरे दोस्तों का ठिकाना

नसीब से मिले
महोब्बत से भरे
वो हमे अपने दिल में बसा कर बैठे हैं
अब समझे हम
इतने खुश कैसे रहते हैं 
एक खुदा 
दुआ करता तुझसे ये दोस्तों का दीवाना 
कि मकबरा हो या आशियाना
मैं रहूं वहीं
जहाँ मेरे दोस्तों का ठिकाना 

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