कहता है फकीर हे राह राहगीर तू कहता है जिसे अपनी जागीर वो है तेरी तक़दीर इसलिए शुक्र मना हर पल मैं भी शुक्र ही मनाता हूँ, तू तो बंगले गाड़ी में रहता है मैं तो सड़क पर बैठा भी उसकी मस्ती में इतरता हूँ.......
कहता है फकीर
हे राह राहगीर
तू कहता है जिसे अपनी जागीर
वो है तेरी तक़दीर
इसलिए शुक्र मना हर पल
मैं भी शुक्र ही मनाता हूँ,
तू तो बंगले गाड़ी में रहता है
मैं तो सड़क पर बैठा भी
उसकी मस्ती में इतरता हूँ.......
हे राह राहगीर
तू कहता है जिसे अपनी जागीर
वो है तेरी तक़दीर
इसलिए शुक्र मना हर पल
मैं भी शुक्र ही मनाता हूँ,
तू तो बंगले गाड़ी में रहता है
मैं तो सड़क पर बैठा भी
उसकी मस्ती में इतरता हूँ.......
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