वो चेहरा जिससे महोब्बत है वो रूह को मिलता नही,

दिल मेरा भटकता है
वो ढूँढे उसे हर कहीं
वो चेहरा जिससे महोब्बत है
वो रूह को मिलता नही,
बातें हैं मुलाक़ातें भी है खुवाबो में
पर मन को वो झिलता नही

हम भी अब ज़िद पकड़ कर बैठे हैं
देखें महोब्बत का हमारा फूल कैसे खिलता नही...........

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