हम हमारे ही घुनेगर हैं हम हमारे ही ग़ालिब है ............

खुद से महोब्बत करना सीख लिया हमने
अब धोका खाने के डर से आज़ाद हैं
अब वक़्त और हालात सब अपने है 
मान लो तो हक़ीक़त वरना सब सपने है
फ़र्क सिर्फ़ इतना है ................ 
तब खुशियों के हम गुलाम थे
अब मलिक है
हम हमारे ही घुनेगर हैं
हम हमारे ही ग़ालिब है ............

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