माँ ज़िंदा है तेरी तू भूल गया


माँ ज़िंदा है तेरी 
तू भूल गया
सावन का झूला तुझे याद है
माँ का आँचल भूल गया .....
बारिश की छम-छम याद है 
माँ की लोरी भूल गया ,
जिसने तुझे कलेजे से लगा कर रखा 
तू उसे गले लगाना भूल गया ,
जो कान तेरी आवाज़ को तरसते थे 
तू उन्हें आवाज़ लगाना भूल गया,
माँ ने तेरे लिए सब कुछ छोड़ा
तू उसे छोड़ कर चल दिया
माँ तुझे समझती नही
एक पल में ही बोल गया 
ए माँ के दुलारे
बारिश की बूँदों से तू माँ के आँसुओं को तोल गया............
तू जीना नही भूला
माँ ज़िंदा है तेरी
तू भूल गया 

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