हम तो खुद को जीतने चले हैं................ यूँ ही नही घर से निकले हैं ..............
हार ही माननी होती
तो आपसे यहाँ मिलने नही आते
हम तो खुद को जीतने चले हैं................
यूँ ही नही घर से निकले हैं ..............
महोब्बत में सारे बाज़ार तुम्हें आवाज़ नही देंगे
वादा करते हैं
तुम खुद बाहों में भर कर महोब्बत का इज़हार करोगे
ये दावा करते है..........
तो आपसे यहाँ मिलने नही आते
हम तो खुद को जीतने चले हैं................
यूँ ही नही घर से निकले हैं ..............
महोब्बत में सारे बाज़ार तुम्हें आवाज़ नही देंगे
वादा करते हैं
तुम खुद बाहों में भर कर महोब्बत का इज़हार करोगे
ये दावा करते है..........
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