उन रिश्तों की कसौटी से मैं रोज़ गिर कर उभरता हूँ

उन रिश्तों की कसौटी से मैं रोज़ गिर कर उभरता हूँ
जिनको मैने प्रेम के धागे से सिया था
जिनके साथ में दिल से जिया था ........
एक वो वक़्त था जब चेहरा मेरा था
और चमक थी उनकी
आज ना वो चेहरा है
ना वो चमक ,
बस उनका एहसास है
जो दिल के पास है ,
वरना उनके बिना तो लगता है वक़्त ही खराब है ..........

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