ठोकर खाए संभला होता .........काश


ठोकर खाए संभला होता .........काश 
जो गावा दिया वक़्त आज उसका गम ना होता .........काश
जो चाहते थे मुझे मैने उनको पुकारा होता ..............काश 
इस काश ने आज वक़्त की अहमियद बतलाई
दस्तक तो वो हर पल देता रहा 
पर मुझे ठोकर खा कर ही समझ आई 

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