महोब्बत

महोब्बत

नशा तेरा इस कदर चॅड गया
गुलाब की खुश्बू
और रंग ,
दोनो ही फीका पढ़ गया,

मेरे सनम तुझे एहसास नही
तू मेरी कमज़ोरी बन चुकी
मेरी ज़िंदगी तेरी महोब्बत के आगे
थम चुकी,

रूह तुझमे इस तरह
रम गई
तेरी साँसों के औरे में
मेरी साँसे बँध गई...........

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